प्यारी जू मोकों कृपा करो - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव की वाणी, सिद्धान्त के पद (186)

प्यारी जू मोकों कृपा करो - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव की वाणी, सिद्धान्त के पद (186)

(राग गौरी)
प्यारी जू मोकों कृपा करो,
ऐसी रूचि उपजै जिए मेरे तुम्हीं न छिन्न बिसरो ॥ [1]
आपुन अपनी करि प्रेम बढ़ावहु, निज रस रीति सौं हियौ भरो ।
श्री बिहारी बिहारिनि दासी कहत यौं, विपिन विहार ढ़रो ॥ [2]

- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव की वाणी, सिद्धान्त के पद (186)

हे प्यारी जू (श्री राधा)! मुझ पर कृपा करें कि मेरे हृदय में ऐसी प्रेम-रुचि उत्पन्न हो जाए कि आप कभी भी, क्षणमात्र के लिए भी, विस्मृत न हों। [1]

आप स्वयं अपनी कृपा से मेरे प्रेम को बढ़ाइए और अपने दिव्य रस की रीति से मेरे हृदय को पूर्णत: भर दीजिए। श्री बिहारी-बिहारिनि की दासी कहती है—हे राधा-कृष्ण! कृपया मुझे अपने वृंदावन के नित्य विहार-रस में पूर्णत: डुबा दीजिए। [2]