श्री राधारमण मंदिर संवत 1591में उपस्थित थे। यह मंदिर संवत 1591 में बनाया गया था। मंदिर के निकट श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी की समाधि है। उन्होंने मंदिर की स्थापना और सेवा की ।
इतिहास:
तीस वर्ष की आयु में, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी वृंदावन आए। चैतन्य महाप्रभु के चले जाने के बाद, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी भगवान से गहन अलगाव महसूस करते थे। भगवान ने श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी को एक सपने में निर्देश दिया कि "यदि आप मेरा दर्शन चाहते हैं तो नेपाल की यात्रा करें"। नेपाल में, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी प्रसिद्ध काली-गंडकी नदी में स्नान कर रहे थे, नदी में अपने पानी के मटके के साथ डुबकी लगाने पर, भट्टजी आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि कई शलिग्राम शिला उनके बर्तन में प्रवेश कर गए। इस तरह उन्होंने शालिग्राम पाया। उनसे जुडी एक बहुत ही दिलचस्प घटना प्रसिद्ध है। श्री गोपाल भट्ट जी महाराज श्री शलिग्राम की पूर्ण निष्ठा से सेवा कर रहे थे। एक बार श्री गोपाल भट्ट जी को एक तीव्र इच्छा महसूस की कि "यदि शालीग्राम के अन्य हिस्सों हाथों और चरणों को देखा पाया, तो वो उन्हें गहनों के साथ सजाएँगे।" यही ठाकुर जी की महिमा है। गीता में कहाँ गया है कि जिस भाव से जो मुझे भजता है मैं भी उसी भाव से ही भजता हूँ । श्री ठाकुरजी जी ने अपनी लीला दिखाई। अगले दिन जब श्री गोपाल भट्ट जी प्रतिदिन की तरह सेवा के लिए गए तो अगले ही दिन शिलाग्राम के हाथ, चरण और चेहरे का प्रादुर्भाव हुआ । श्री गोपाल भट्ट जी की खुशी का कोई अंत नहीं था।
मंदिर का समय:
गर्मी
सवेरे 5:00 बजे - मंगला आरती
सवेरे 10:00 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:30 बजे - राजभोग आरती
शाम 7:15 बजे - संध्या आरती
शाम 9:30 बजे - शयन आरती
समाज गायन - [7:30 PM]
सर्दी
सवेरे 5:30 बजे - मंगला आरती
सवेरे 10:30 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:30 बजे - राजभोग आरती
शाम 6:30 बजे - संध्या आरती
शाम 9:00 बजे - शयन आरती
समाज गायन - [7:00 PM]
स्थान:
श्री राधारमण जी वृंदावन जिला मथुरा, राज्य उत्तर प्रदेश और देश भारत में स्थित है। यह परिक्रमा मार्ग और श्री बाँके बिहारी मंदिर के पास ही स्थित है।
तीस वर्ष की आयु में, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी वृंदावन आए। चैतन्य महाप्रभु के चले जाने के बाद, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी भगवान से गहन अलगाव महसूस करते थे। भगवान ने श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी को एक सपने में निर्देश दिया कि "यदि आप मेरा दर्शन चाहते हैं तो नेपाल की यात्रा करें"। नेपाल में, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी प्रसिद्ध काली-गंडकी नदी में स्नान कर रहे थे, नदी में अपने पानी के मटके के साथ डुबकी लगाने पर, भट्टजी आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि कई शलिग्राम शिला उनके बर्तन में प्रवेश कर गए। इस तरह उन्होंने शालिग्राम पाया। उनसे जुडी एक बहुत ही दिलचस्प घटना प्रसिद्ध है। श्री गोपाल भट्ट जी महाराज श्री शलिग्राम की पूर्ण निष्ठा से सेवा कर रहे थे। एक बार श्री गोपाल भट्ट जी को एक तीव्र इच्छा महसूस की कि "यदि शालीग्राम के अन्य हिस्सों हाथों और चरणों को देखा पाया, तो वो उन्हें गहनों के साथ सजाएँगे।" यही ठाकुर जी की महिमा है। गीता में कहाँ गया है कि जिस भाव से जो मुझे भजता है मैं भी उसी भाव से ही भजता हूँ । श्री ठाकुरजी जी ने अपनी लीला दिखाई। अगले दिन जब श्री गोपाल भट्ट जी प्रतिदिन की तरह सेवा के लिए गए तो अगले ही दिन शिलाग्राम के हाथ, चरण और चेहरे का प्रादुर्भाव हुआ । श्री गोपाल भट्ट जी की खुशी का कोई अंत नहीं था।
मंदिर का समय:
गर्मी
सवेरे 5:00 बजे - मंगला आरती
सवेरे 10:00 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:30 बजे - राजभोग आरती
शाम 7:15 बजे - संध्या आरती
शाम 9:30 बजे - शयन आरती
समाज गायन - [7:30 PM]
सर्दी
सवेरे 5:30 बजे - मंगला आरती
सवेरे 10:30 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:30 बजे - राजभोग आरती
शाम 6:30 बजे - संध्या आरती
शाम 9:00 बजे - शयन आरती
समाज गायन - [7:00 PM]
स्थान:
श्री राधारमण जी वृंदावन जिला मथुरा, राज्य उत्तर प्रदेश और देश भारत में स्थित है। यह परिक्रमा मार्ग और श्री बाँके बिहारी मंदिर के पास ही स्थित है।

