प्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जी की वाणी (26)

प्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जी की वाणी (26)

प्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत,
श्री विट्ठल विपुल विनोद बिहारिनि पिय को सर्वेषु लूटत ||

- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जी की वाणी (26)

प्यारी जु के नेत्र मानो अत्यंत ही मनोहर हैं, जब भी बिहारिनि श्री राधा अपने नेत्रों से अवलोकन करती हैं तो मानो उसी क्षण प्रियतम बिहारी श्री कृष्ण का सबकुछ ही लूट लेती हैं।