हम गावें सोई करें - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (3)

हम गावें सोई करें - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (3)

हम गावें सोई करें, सहज लाड़िली लाल।
करै लाडिली लाल सो, हम गायें तत्काल॥

- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (3)

श्री भगवत रसिक जी के शब्दों में सखी और लाड़ली लाल के परस्पर प्रेम का वर्णन है। जो सखी के मन में भाव आता है, तुरन्त लाड़ली लाल प्रेमवशीभूत होकर वह लीला करते हैं। और जो राधा-कृष्ण लीला करते हैं, वह हम (सखी) तत्काल गान करती हैं।