जय जय वृन्दावन आनंद मूल |
शरण आये पाए राधाधव, मिटी अनेक जनम की भूल ||
- श्री भट्ट देवाचार्य - युगल शतक (03)
आनंद का मूल स्त्रोत (एवं रस की उत्पति का केंद्र) वृंदावन धाम ही है। बस वृंदावन धाम में आश्रय लेकर, श्री राधा के प्रिय श्री कृष्ण का सहयोग हो जाता है, जो सकारात्मक रूप से अनगिनत जीवनकाल के दुर्भाग्य को सुधार देगा |
शरण आये पाए राधाधव, मिटी अनेक जनम की भूल ||
- श्री भट्ट देवाचार्य - युगल शतक (03)
आनंद का मूल स्त्रोत (एवं रस की उत्पति का केंद्र) वृंदावन धाम ही है। बस वृंदावन धाम में आश्रय लेकर, श्री राधा के प्रिय श्री कृष्ण का सहयोग हो जाता है, जो सकारात्मक रूप से अनगिनत जीवनकाल के दुर्भाग्य को सुधार देगा |

