दसहुँ दिशा में गोविन्द राधे, जित देखुँ राधे दीखें बता दे || - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (6114) मैं समस्त दिशाओं में केवल श्री राधा रानी को ही देखता हूं।