जहाँ जहाँ चरन पडत प्यारी जू तेरे, तहँ तहँ मन मेरो करत फिरत परछाईं ||
- श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलिमाल
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूपी चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाई की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है ।
- श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलिमाल
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूपी चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाई की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है ।

