मन तू वृन्दावन के मारग लागि - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (92)

मन तू वृन्दावन के मारग लागि - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (92)

मन तू वृन्दावन के मारग लागि |
तेरा न कोऊ न तू काहूकौ, माया मोह तजि भागी ||

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (92)

अरे मन तू वृन्दावन रसिकों के बताये हुए मार्ग में ही चल। न तो तेरा कोई है, न तू किसी का है, इसलिए मायिक अज्ञान और मोह को त्याग कर रसिकों की राजधानी वृन्दावन में भागो।