यह आनंद कहौ न परे री - श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (48)

यह आनंद कहौ न परे री - श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (48)

यह आनंद कहौ न परे री |
श्री ललित मोहिनी यह सुख विलसत देखती नैन सीरैं री ||

- श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (48)

वृंदावन का परम आनंद ("नित्य विहार") शब्दों में नहीं बताया जा सकता। श्री ललित मोहिनी देव  कहते हैं कि जब भी मै श्री राधा कृष्ण की जोड़ी को देखता हूँ तो मेरी आंखें आनंद रस से भर जाती है।