हित हरिवंश प्रपंच बंच सब काल व्याल कौ खायौ |
यह जिय जानि स्याम स्यामा पद कमल संगि सिर नायौ | |
- श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (59)
यह जिय जानि स्याम स्यामा पद कमल संगि सिर नायौ | |
- श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (59)
श्रीहित हरिवंश चन्द्र महाप्रभुपाद कहते हैं यह विश्व प्रपञ्च एक दम झूठा है – असत् है और काल सर्प से ग्रसित है ( अर्थात् अवश्य विनाशी है , ) ऐसा अपने हृदय में समझ कर मैंने श्रीश्यामा श्याम पद कमल सङ्गी – रसिक भक्त जनों को अपना मस्तक झुका दिया अर्थात् उनके प्रति समर्पण पूर्वक मैंने उनका ही एक मात्र चरणाश्रय ग्रहण किया है ।

