राधा नाम पे मैं वारी - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२००)

राधा नाम पे मैं वारी - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२००)

राधा नाम पे मैं वारी, जो सुमरै अनुराग होत, दृग जुगुल रूप हितकारी ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (200)

मैं स्वयं को 'राधा' नाम पर बलिदान देता हूं। जो भी इस नाम को प्रेम के साथ रटता है, यह नाम इतना लाभदायक है कि आंखें में दिव्य युगल के रूप का प्रादुर्भाव प्राप्त हो जाता है।