सब द्वारन को छाड़ के मैं आयी तेरे द्वार - ब्रज रसिक

सब द्वारन को छाड़ के मैं आयी तेरे द्वार - ब्रज रसिक

सब द्वारन को छाड़ के, मैं आयी तेरे द्वार।
अहो वृषभानु की लाडली, अब मेरी ओर निहार॥

- ब्रज रसिक

हे वृषभानु-नन्दिनी लाड़ली श्रीराधा! मैं संसार के समस्त आश्रयों और द्वारों का परित्याग कर, अनन्य भाव से केवल आपके पावन द्वार पर उपस्थित हुई हूँ। हे स्वामिनी! अब मुझ दीन शरणागत पर अपनी वह परम शीतल एवं करुणामयी दृष्टिपात कीजिए।