आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की।
दुहुँन सिर कनक-मुकुट झलकै, दुहुँन श्रुति कुण्डल भल हलकै,
दुहुँन दृग प्रेम सुधा छलकै, चसीले बैन, रसीले नैन, गँसीले सैन,
दुहुँन मैनन मनहारी की॥
दुहुँनि दृग चितवनि पर वारि, दुहुँनि लट-लटकनि-छवि न्यारी,
दुहुँनि भौं-मटकनि अति प्यारी, रसन मुख पान, हँसन मुस्कान, दसन दमकान,
दुहुँनि बेसर छवि न्यारी की॥
एक उर पीताम्बर फहरै, एक उर नीलाम्बर लहरै,
दुहुँन उर लर-मोतिन छहरै, कंकनन खनक, किंकिनिन झनक, नुपूरन भनक,
दुहुँन रुनझुन धुनि प्यारी की॥
एक सिर मोर-मुकुट राजै, एक सिर चूनरी-छवि छाजै,
दुहुँन सिर तिरछे भल भ्राजै, संग ब्रज बाल, लाडिली-लाल, बाँह बाँह गल डाल,
‘कृपालु’ दुहुँन दृग चारि की॥ आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
दुहुँन सिर कनक-मुकुट झलकै, दुहुँन श्रुति कुण्डल भल हलकै,
दुहुँन दृग प्रेम सुधा छलकै, चसीले बैन, रसीले नैन, गँसीले सैन,
दुहुँन मैनन मनहारी की॥
दुहुँनि दृग चितवनि पर वारि, दुहुँनि लट-लटकनि-छवि न्यारी,
दुहुँनि भौं-मटकनि अति प्यारी, रसन मुख पान, हँसन मुस्कान, दसन दमकान,
दुहुँनि बेसर छवि न्यारी की॥
एक उर पीताम्बर फहरै, एक उर नीलाम्बर लहरै,
दुहुँन उर लर-मोतिन छहरै, कंकनन खनक, किंकिनिन झनक, नुपूरन भनक,
दुहुँन रुनझुन धुनि प्यारी की॥
एक सिर मोर-मुकुट राजै, एक सिर चूनरी-छवि छाजै,
दुहुँन सिर तिरछे भल भ्राजै, संग ब्रज बाल, लाडिली-लाल, बाँह बाँह गल डाल,
‘कृपालु’ दुहुँन दृग चारि की॥ आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

