लाख बार हरि हरि कहो, एक बार हरिदास।
अति प्रसन्न श्री लाड़ली, देत विपिन को वास॥
- श्री ललित किशोरी देव, सिद्धांन्त की साखी (447)
अति प्रसन्न श्री लाड़ली, देत विपिन को वास॥
- श्री ललित किशोरी देव, सिद्धांन्त की साखी (447)
यदि कोई लाख बार "श्रीहरि-हरि" कहता है, परंतु एक बार ललिता-अवतार स्वामी हरिदासजी के "हरिदास" नाम का उच्चारण करता है, तो श्रीराधा महारानी इतनी प्रसन्न हो उठती हैं कि उसे शीघ्र ही अपने निज महल श्रीवृन्दावन में वास का अद्भुत सौभाग्य प्रदान करती हैं।

