(जै श्री) हित हरिवंश प्रताप रूप गुन वय बल स्याम उजागर | जाकी भ्रू विलास बस पसुरिव दिन विथकत रस सागर ||
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (52)
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (52)
श्रीहित हरिवंश चन्द्र (महाप्रभु) कहते हैं, मैं इतना ही कहूं -"श्रीश्याम सुन्दर तो प्रताप, रूप, गुण, आयु (वय) एवं बल सभी बातों में उजागर हैं -प्रगट हैं फिर भी वे रस समुद्र श्याम जिसकी भृकुटियों के इशारे के वशवर्त्ती पशु की भाँति निरन्तर लाचार से रहे आते हैं, (उस रूप की सीमा श्रीराधा को देखो, समझो)"।

