वृन्दावन चल जाइए, छाँड़ि सकल जग व्याधि।
राधे राधे गाइए, श्री राधे पल आधि॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (251)
राधे राधे गाइए, श्री राधे पल आधि॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (251)
सांसारिक व्याधियों और कष्टों का पूर्णतः त्याग कर, श्री वृन्दावन धाम की ओर प्रस्थान कीजिए। वहाँ पहुँचकर निरंतर 'श्री राधे-राधे' का ही मधुर गान कीजिए और आधे पल को भी श्री राधा महारानी को नहीं भूलिए।

