सकल आयु सत कर्म में - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजनशत (95)

सकल आयु सत कर्म में - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजनशत (95)

सकल आयु सत कर्म में, जो पै बितई होई।
भक्तनि कौ अपराध इक, डारत छिन में खोई॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजनशत (95)

यद्यपि किसी व्यक्ति ने जीवनपर्यंत केवल सत्कर्म ही संचित किए हों, तथापि श्रीहरि के अनन्य भक्तों के प्रति किया गया लेशमात्र (सूक्ष्म) अपराध भी उसके समस्त पुण्यों को क्षण भर में भस्मीभूत कर देता है।