वेदनि खोबै बैद सो, गुरु गोबिंद मिलाप।
भूख भजै भोजन सोई, भगवत और खिलाप॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (20)
भूख भजै भोजन सोई, भगवत और खिलाप॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (20)
सच्चा वैद्य वही है जो रोग को जड़ से मिटा दे, वास्तविक गुरु वही है जो गोविन्द से मिला दे, सच्चा भोजन वही है जो भूख मिटा दे। भगवत रसिक जी कहते हैं कि ऐसा करने की सामर्थ्य न रखने वाले वैद्य, गुरु और भोजन निरर्थक हैं।

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