हम कब होहिंगे ब्रजवासी - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (104)

हम कब होहिंगे ब्रजवासी - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (104)

(राग सारंग)
हम कब होहिंगे ब्रजवासी।
ठाकुर नंदकिशोर हमारे, ठकुराइनि राधा सी।।
कब मिलि हैं वे सखी सहेली, हरिवंशी हरिदासी।
वंशीवट की शीतल छहियाँ, सुभग नदी जमुना सी।।
जाकी वैभव करत लालसा, कर-मीत कमलासी।
इतनी आस व्यास की पुजवहु वृन्दाविपिन विलासी |

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (104)

विशाखा अवतार श्री हरिराम व्यास जी के शब्दों में ऐसा कब होगा की हम सच्चे ब्रजवासी बन जाएंगे, क्यूंकि हमारे ठाकुर श्री कृष्ण हैं एवं श्री राधारानी सी हमारी ठकुरानी हैं | ऐसा कब होगा की हमें हमारी प्राण प्यारी सखियाँ, हरिदासी (ललिता सखी), हरिवंशी (हित सखी) का संग भी मिलेगा | ऐसा कब होगा की हम वृन्दावन में श्री राधा कृष्ण के साथ लीला में भाग लेंगे जहाँ बंशीवट (जहाँ श्री कृष्ण ने महारास लीला की थी) की शीतल छाया है, जहाँ सुन्दर रस रानी यमुना नदी बह रही है | यह ऐसा दिव्य धाम हैं जहाँ महालक्ष्मी भी हाथ जोड़ कर वृन्दावन धाम की सीमा के बाहर खड़ी है, परन्तु उनको वृंदावन धाम में प्रवेश नहीं हो पा रहा | श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं की मेरी इतनी ही आशा को अब पूरा कर दो, की मुझे वृन्दावन धाम में सेवा का अवसर मिल जाए एवं अब मुझे वृन्दावन धाम सच्चा ब्रजवासी बनादे|