तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे - श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलिमाल (41)

तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे - श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलिमाल (41)

तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे,
श्री सोभा बरनी न जाए अगाधे ||

- श्री हरिदास जी (ललिता अवतार), केलिमाल

श्री लाल जी श्री प्यारी जू से कहते हैं कि आपका यश अनंत कोटि ब्रह्माण्डों में व्याप्त है और आपकी शोभा अगाध एवं अनंत है अर्थात उसका वर्णन करना सर्वथा असंभव है।