"बने न कहत राधा कौ रूप,
व्यास स्वामिनी सौं विहरत ही, मोहन लगत सरूप || "
श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (77)
व्यास स्वामिनी सौं विहरत ही, मोहन लगत सरूप || "
श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (77)
श्री राधा के दिव्य रूप का वर्णन करना बिल्कुल असंभव है। श्री हरिराम व्यास कहते हैं, श्री कृष्ण स्वामिनी श्री राधा रानी के साथ विहरण करने के कारण ही सुंदर एवं सरूप दिखते हैं।

