पायन परि बिनती करे, से रस मुख्य सिंगार ||
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (8)
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (8)
लाल जी श्री प्रिया जी के चरणों में पड़ कर उनसे जो दैन्य पूर्वक विनय किया करते हैं वही मुख्य रस श्रृंगार रस है।

