नव वन नव निकुंज नव बाला
नवरंग रसिक रसीलो मोहन विलसत कुंजबिहारी लाला ||
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (35)
नवरंग रसिक रसीलो मोहन विलसत कुंजबिहारी लाला ||
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (35)
वृन्दावन में कभी नया वन, कभी नया निकुंज, कभी नई श्री राधा और अन्य सखियाँ, कभी नए रसिक कुंज बिहारी और कभी नित्य नया रस एवं लीला है !

