सुनत न काहू की कही, कहे न अपनी बात।
नारायण वा रूप में, मगन रहे दिन रात॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (158)
नारायण वा रूप में, मगन रहे दिन रात॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (158)
न तो मैं किसी को सुनता हूँ, न ही मैं किसी से कुछ भी कहता हूँ। श्री नारायण स्वामी कहते हैं, मेरा मन रात दिन श्री राधा कृष्ण की रूप माधुरी में पूर्ण रूप से डूबा हुआ है।

