कुँवरि चरन अंकित धरनि - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (37)

कुँवरि चरन अंकित धरनि - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (37)

कुँवरि चरन अंकित धरनि, देखत जेहि जेहि ठौर।
प्रिया चरन रज जानि कै, लुठत रसिक सिरमौर॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (37)

रसिक शेखर श्री श्यामसुन्दर कुँवरि श्री राधा के चरणों के चिन्ह श्री वृन्दावन में जहाँ-जहाँ अंकित देखते हैं, वहाँ प्रिया चरणों की रज जानकर लोटने लगते हैं।