नारायण मन में बसी लोक लाज कुलकान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रास (127)

नारायण मन में बसी लोक लाज कुलकान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रास (127)

नारायण मन में बसी, लोक लाज कुलकान।
आशक होना श्याम को, हाँसी खेल ना जान॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रास (127)

श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि हे मन! तू अभी भी सांसारिक लज्जा और कुल की मर्यादा (मर्यादाओं के बंधन) में फँसा हुआ है। श्री श्यामसुन्दर का प्रेमी (आशिक) होना कोई हँसी-खेल या साधारण बात नहीं है; इसके लिए सर्वस्व और अहंकार का पूर्ण त्याग आवश्यक है।