निरखि मुख सुख पावत मेरे नैंन ,
श्री व्यास स्वामिनी की अद्भुत छबि, कवि पै कहत बनैंन |
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (124)
हे श्री राधा, आपके मुख का दर्शन करके मेरे नैन अनंत सुख का अनुभव करते हैं। श्री हरिराम व्यास (विशाखा सखी के अवतार) कहते हैं कि कोई भी रसिक भक्त/कवि उनकी दिव्य सुंदरता का वर्णन नहीं कर सकता है। यह सुंदरता शब्दों से परे है।
श्री व्यास स्वामिनी की अद्भुत छबि, कवि पै कहत बनैंन |
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (124)
हे श्री राधा, आपके मुख का दर्शन करके मेरे नैन अनंत सुख का अनुभव करते हैं। श्री हरिराम व्यास (विशाखा सखी के अवतार) कहते हैं कि कोई भी रसिक भक्त/कवि उनकी दिव्य सुंदरता का वर्णन नहीं कर सकता है। यह सुंदरता शब्दों से परे है।

