जावक जुत जुग चरण लली के । [1]
अद्भुत, अमल, अनूप, दिवाकर, मोहन मानस कंज कली के ॥ [2]
मंजुल, मृदुल मनोहर, सुखनिधि, सुभग सिंगार निकुंज गली के । [3]
सुरतरु कामधेनु, चिंतामणि, भगवत रसिक अनन्य अली के ॥ [4]
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यनिश्चयात्म ग्रन्थ, पूर्वार्द्ध (33)
श्री किशोरी जी के महाबर से युक्त दोनों चरणारविंद अद्भुत निर्मल एवं अनुपम हैं। [1]
ये प्रियतम की हृदय रूपी कमल कलिका को विकसित करने वाले सूर्य हैं । [2]
सुन्दर, कोमल मनोहर और आनंद के पारावार ये (चरणारविन्द) निकुंज गली के सुभग श्रृंगार है। [3]
भगवत रसिक जी कहते हैं कि (मनोकामनाओं को पूरा करने वाले होने के कारण) मेरे जैसी अनन्य सखी के लिए तो ये ही कल्पवृक्ष है, ये ही कामधेनु हैं और ये ही चिंतामणि हैं। मेरी तो ये ही सब कुछ है || ३३ ||
अद्भुत, अमल, अनूप, दिवाकर, मोहन मानस कंज कली के ॥ [2]
मंजुल, मृदुल मनोहर, सुखनिधि, सुभग सिंगार निकुंज गली के । [3]
सुरतरु कामधेनु, चिंतामणि, भगवत रसिक अनन्य अली के ॥ [4]
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यनिश्चयात्म ग्रन्थ, पूर्वार्द्ध (33)
श्री किशोरी जी के महाबर से युक्त दोनों चरणारविंद अद्भुत निर्मल एवं अनुपम हैं। [1]
ये प्रियतम की हृदय रूपी कमल कलिका को विकसित करने वाले सूर्य हैं । [2]
सुन्दर, कोमल मनोहर और आनंद के पारावार ये (चरणारविन्द) निकुंज गली के सुभग श्रृंगार है। [3]
भगवत रसिक जी कहते हैं कि (मनोकामनाओं को पूरा करने वाले होने के कारण) मेरे जैसी अनन्य सखी के लिए तो ये ही कल्पवृक्ष है, ये ही कामधेनु हैं और ये ही चिंतामणि हैं। मेरी तो ये ही सब कुछ है || ३३ ||

