सुरभी कुंड गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के दायीं तरफ स्थित है, आगे जाकर आप राघव पंडित की गुफा, और दूसरी तरफ रुद्र कुंड आदि देख सकते हैं। इंद्र देव ने अनुरोध किया तो सुरभी ने कुंड में अपने उदर के दूध के साथ गोविंद जी का अभिषेक किया था। तत्पश्चात् श्रीकृष्ण की गोचारण लीला तथा विशेषत: श्रीराधा- कृष्ण युगल की निभृत निकुञ्जलीला का दर्शन करने के लोभ से वे श्रीकृष्ण की ब्रज लीला तक यहीं निवास करने लगीं। यह गोवर्धन में स्थित है। महाराज वज्रनाभ ने इनकी स्मृति के लिए इस सुरभि कुण्ड की स्थापना की थी। यहाँ स्नान एवं आचमन करने से सारे पाप, अपराध एवं अनर्थ दूर हो जाते हैं तथा ब्रज का प्रेम प्राप्त होता है।

