(राग कालिंगडा)
"करु मन जुगलचरण अनुराग |
बहुत दिवस तोहिं सोवत बीते, जाग रे मूरख जाग | |
बेमुखियन की संगति सों तू, जैसे बनै त्यों भाग |
बस वृन्दावन भज राधावर, भूलिके अन्त न लाग | |"
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (4)
अरे मन, युगल सरकार के कमल चरणों से प्रेम करो। तुम अनंत काल से अज्ञानता में सो रहे हो। हे मूर्ख, यह जागने का समय है। जो तेरी भक्ति के पक्ष में एवं उसमें बाधा पहुँचाने वाले हैं, उनसे किसी भी तरह दूर भाग जा। वृंदावन का आश्रय ले, श्री युगल सरकार का भजन कर और भूल कर भी अन्य जगह मन का लगाव न कर ।
"करु मन जुगलचरण अनुराग |
बहुत दिवस तोहिं सोवत बीते, जाग रे मूरख जाग | |
बेमुखियन की संगति सों तू, जैसे बनै त्यों भाग |
बस वृन्दावन भज राधावर, भूलिके अन्त न लाग | |"
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (4)
अरे मन, युगल सरकार के कमल चरणों से प्रेम करो। तुम अनंत काल से अज्ञानता में सो रहे हो। हे मूर्ख, यह जागने का समय है। जो तेरी भक्ति के पक्ष में एवं उसमें बाधा पहुँचाने वाले हैं, उनसे किसी भी तरह दूर भाग जा। वृंदावन का आश्रय ले, श्री युगल सरकार का भजन कर और भूल कर भी अन्य जगह मन का लगाव न कर ।

