पलकनि के जैसें अधिक, पुतरिन सौं अति प्यार।
ऐसे लाड़ली लाल के, छिन्न छिन्न चरण सँभार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, युगल ध्यान (20)
जिस प्रकार आँखों को पलकों से अनन्य प्रेम होता है और पलकें हर क्षण आँखों को रक्षा प्रदान करती हैं, वैसे ही हमें श्रीयुगल सरकार (लाड़ली-लाल) के कमल-चरणों से प्रेम करना चाहिए और ध्यान वहीं लगाना चाहिए जिससे हमारा भजन नित्य बना रहे।
ऐसे लाड़ली लाल के, छिन्न छिन्न चरण सँभार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, युगल ध्यान (20)
जिस प्रकार आँखों को पलकों से अनन्य प्रेम होता है और पलकें हर क्षण आँखों को रक्षा प्रदान करती हैं, वैसे ही हमें श्रीयुगल सरकार (लाड़ली-लाल) के कमल-चरणों से प्रेम करना चाहिए और ध्यान वहीं लगाना चाहिए जिससे हमारा भजन नित्य बना रहे।

