(राग जिला झिंझोटी)
जब श्रीवनवास मिलो सजनी, तब तीरथ आन गए न गए।
जब लाड़लीलाल को नाम लयो, तव नाम न आन लये न लये॥ [1]
पदकंज किशोरीहि चित्त पग्यो, तव पायन आन नए न नए।
जब नैन लगे मनमोहनसों, तब औगुन आन भये न भये ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (233)
यदि श्रीवृन्दावन में वास मिल गया, तब अन्य तीर्थों पर जाने की आवश्यकता नहीं रही।
यदि लाड़लीलाल का नाम ले लिया, तब किसी और नाम को लेने की जरूरत नहीं रही। [1]
यदि हृदय श्री राधा के चरण-कमलों में लग गया, तब किसी अन्य पथ या किसी अन्य के चरणों में झुकने की आवश्यकता नहीं रही।
यदि नयन मनमोहन (श्रीकृष्ण) में लग गए, तब बाकी सभी अवगुण अपने आप मिट गए। [2]
जब श्रीवनवास मिलो सजनी, तब तीरथ आन गए न गए।
जब लाड़लीलाल को नाम लयो, तव नाम न आन लये न लये॥ [1]
पदकंज किशोरीहि चित्त पग्यो, तव पायन आन नए न नए।
जब नैन लगे मनमोहनसों, तब औगुन आन भये न भये ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (233)
यदि श्रीवृन्दावन में वास मिल गया, तब अन्य तीर्थों पर जाने की आवश्यकता नहीं रही।
यदि लाड़लीलाल का नाम ले लिया, तब किसी और नाम को लेने की जरूरत नहीं रही। [1]
यदि हृदय श्री राधा के चरण-कमलों में लग गया, तब किसी अन्य पथ या किसी अन्य के चरणों में झुकने की आवश्यकता नहीं रही।
यदि नयन मनमोहन (श्रीकृष्ण) में लग गए, तब बाकी सभी अवगुण अपने आप मिट गए। [2]

