कुंजबिहारिनि लाड़िली मेरी जीवन प्राण श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (413)

कुंजबिहारिनि लाड़िली मेरी जीवन प्राण श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (413)

कुंजबिहारिनि लाड़िली, मेरी जीवन प्राण।
ताहि के सुख में सुखी, मोहिं रसिक की आन॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (413)

साक्षात् नित्य-विहारिणी (श्रीराधा महारानी) ही मेरे प्राणों का एकमात्र आधार हैं। उनके सुख में सदा सुखी रहना ही मेरे जीवन का परम लक्ष्य और एकमात्र साध्य है।