नित्य विहार सार सबको - श्री नागरीदेव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (4)

नित्य विहार सार सबको - श्री नागरीदेव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (4)

नित्य विहार सार सबको, अति दुर्लभ अगम अपार॥
- श्री नागरी देव जू, श्री नागरीदेव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (4)

'नित्य विहार' सभी ग्रंथों, वेदों आदि का सार है, जिसका न आदि है न अंत—जो अत्यंत दुर्लभ है।