सदा वृन्दावन सब की आदि - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (4)

सदा वृन्दावन सब की आदि - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (4)

सदा वृन्दावन सब की आदि,
रसनिधि, सुखनिधि, जहाँ बिराजत नित्य, अनंत, अनादि ||

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (4)

वृंदावन धाम सदैव सब कुछ का मूल रहा है। अनगिनत जीवनकाल के लिए आनंद और खुशी का अंतहीन खजाना यहाँ हर पल में मौजूद है।