रहो दास्यं तस्याः किमपि वृषभानोरव्रर्ज्रवरी - मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि

रहो दास्यं तस्याः किमपि वृषभानोरव्रर्ज्रवरी - मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि

रहो दास्यं तस्याः किमपि वृषभानोरव्रर्ज्रवरी, यसः पुत्रयाः पूर्ण प्रणय रस मूर्ति यदि लभे |
तदा नः किं धर्मै: किमु सुर गणै: किं च विधिना, किमीशेन श्याम प्रिय मिलन यत्नरैपि च किम || 115 ||

- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि

यदि व्रज वरीयान वृषभानुराय की पूर्ण प्रेम रस मूर्ति पुत्री श्री राधा का हमें एकांत दास्य लाभ हो जाए तो फिर हमें धर्म से, देवता गणों से, ब्रह्मा और शंकर से, अरे! श्याम सुन्दर के प्रिय मिलन यत्न से भी क्या प्रयोजन है ?