अलबेली सुकुमारी नैननिं के आगैं रहै - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रिंगार शत 1 (45)

अलबेली सुकुमारी नैननिं के आगैं रहै - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रिंगार शत 1 (45)

अलबेली सुकुमारी नैननिं के आगैं रहै,
जब लगी प्रीतम के प्राण रहें तन में ||

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रिंगार शत 1 (45)

जब तक प्रिया जी प्यारे श्याम सुन्दर के नैनों के सामने रहती हैं, केवल तभी तक श्याम सुन्दर देह में प्राणों का अनुभव करते हैं।