श्री वृन्दावन जब देखौं तबहिं - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (175)

श्री वृन्दावन जब देखौं तबहिं - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (175)

श्री वृन्दावन जब देखौं तबहिं, नयौ नित लेत प्रेम उपजाई।
या रंग रस में मन झूमई तौ, भूली पाछिलौ जाइ॥

- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (175)

हर बार जब भी मैं वृन्दावन को देखता हूँ, मुझे परमानन्द की प्राप्ति होती है। मेरा मन दैविक रस में जब भी डगमगाता है, वृन्दावन का दैविक प्रभाव मेरे जीवन की सभी चिन्ताओं को समाप्त कर देता है।