रसिक अनन्य सौं मिलै - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (219)

रसिक अनन्य सौं मिलै - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (219)

रसिक अनन्य सौं मिलै, कही सुनिबे की बात।
कुंजबिहारिनि कौ भजन, यहै खेम कुसलात॥

- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (219)

परम रसिक आचार्य श्रीबिहारिनदेवजी महाराज बोध कराते हैं कि निरंतर रसिक अनन्यों का सत्संग करें और उनके मध्य ही इस रसोपासना के रहस्यों का अनुशीलन करें। अपने चित्त को समस्त अन्य आलंबनों से हटाकर एकमात्र श्रीकुँजबिहारिणी श्रीराधा जू के भजन में ही लगाएँ, इसमें ही परम आनंद है।