गौर स्याम सोभा सागर कौ, नाँहिन वारापारु |
व्यास स्वामिनी की छबि आगैं, सकल सरूप उगारु ||
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी
"युगल सरकार की शोभा रुपी समुद्र, जो नित्य प्रतिदिन बढ़ता रहता है उसका आंकलन करना (मापना) असंभव है। श्री हरिराम व्यास जी कहते है कि किशोरी जू की छवि के प्रकाश के आगे सब प्रकाश फीके है।"
व्यास स्वामिनी की छबि आगैं, सकल सरूप उगारु ||
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी
"युगल सरकार की शोभा रुपी समुद्र, जो नित्य प्रतिदिन बढ़ता रहता है उसका आंकलन करना (मापना) असंभव है। श्री हरिराम व्यास जी कहते है कि किशोरी जू की छवि के प्रकाश के आगे सब प्रकाश फीके है।"

