श्यामा पग लवलीन हो, उन्हीं के हाथ विकाय |
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२३६.२)
श्री कृष्ण, जो रसिको के सिरमौर है,रसिकशेखर है, वे अपने आपको उन्हीं को बेचते है जो श्री राधा के चरणों की भक्ति में तल्लीन रहते हैं।
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२३६.२)
श्री कृष्ण, जो रसिको के सिरमौर है,रसिकशेखर है, वे अपने आपको उन्हीं को बेचते है जो श्री राधा के चरणों की भक्ति में तल्लीन रहते हैं।

