(राग केदारो व कामोद)
जयति नव नागरी , कृष्ण-सुख-सागरी ,
सकल गुन-आगरी , दीनन भोरी !
जयति हरि-भामिनि , कृष्ण-घन-दामिनी ,
मत्त गज-गामिनी , नव किशोरी !!
जयति पिय-केलि हित, कनक नव बेलिसम
कृष्ण कलकलप निसि मिलि बिलासिनी !
जयति वृषभान-कुल-कुमुद-बन-कुमुदिनी ,
कृष्ण-सुख हिमकर निरख प्रकासिनी !!
जयति गोपाल मन-मधुप नव मालती ,
जयति गोविंद-मुख-कमल-भृंगी !
जयति नँदनंदन-उर, परम आनंद-निधि ,
लाल गिरिधरन पिय-प्रेम-रंगी !!
जयति सौभाग्य-मनि , कृष्ण-अनुराग-मनि,
सकल पिय मुकुट-मनि , सुजस लीजै !
दीजियै दान यह "व्यास' निज दास कों ,
कृष्ण सों बहुरि नहिं मान कीजै !!
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (47)
जयति नव नागरी , कृष्ण-सुख-सागरी ,
सकल गुन-आगरी , दीनन भोरी !
जयति हरि-भामिनि , कृष्ण-घन-दामिनी ,
मत्त गज-गामिनी , नव किशोरी !!
जयति पिय-केलि हित, कनक नव बेलिसम
कृष्ण कलकलप निसि मिलि बिलासिनी !
जयति वृषभान-कुल-कुमुद-बन-कुमुदिनी ,
कृष्ण-सुख हिमकर निरख प्रकासिनी !!
जयति गोपाल मन-मधुप नव मालती ,
जयति गोविंद-मुख-कमल-भृंगी !
जयति नँदनंदन-उर, परम आनंद-निधि ,
लाल गिरिधरन पिय-प्रेम-रंगी !!
जयति सौभाग्य-मनि , कृष्ण-अनुराग-मनि,
सकल पिय मुकुट-मनि , सुजस लीजै !
दीजियै दान यह "व्यास' निज दास कों ,
कृष्ण सों बहुरि नहिं मान कीजै !!
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (47)

