वृन्दारण्य निकुंजसीमसु सदा स्वॉँग रंगोत्सवै, मद्यित्यदभुत माधवाधर-सुधा माध्वीक संस्वादनै: |
गोविन्द प्रिय वर्ग दुर्गम सखी वृन्दैरनालक्षिता, दास्यं दास्यति मे कदा नु कृपया वृन्दावनाधीश्वरी ||
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु , श्री राधा सुधा निधि (128)
गोविन्द प्रिय वर्ग दुर्गम सखी वृन्दैरनालक्षिता, दास्यं दास्यति मे कदा नु कृपया वृन्दावनाधीश्वरी ||
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु , श्री राधा सुधा निधि (128)
जो सर्वदा श्रीवृन्दावन निकुंज सीमा में अपने अंग रंगोस्तव के द्वारा माधव की अति अद्भुत अधर सुधा का आस्वादन करके उन्मत हो रही हैं, और जो गोविन्द के प्रियजनों को भी दुर्गम, सखी समुदाय के लिए अलक्षित हैं, वे श्री वृन्दावनाधीश्वरी कब मुझे कृपा पूर्वक अपना दास्य प्रदान करेंगी ?

