कीजै रंगमहल की दासी |
सरस नागरी नरहरि रसिक ललित जु चरन उपासी | |
वृन्दावन की सहज माधुरी श्रीस्वामी परकासी |
- श्री रूप सखी, रूप सखी जी की वाणी, सिद्धांत के पद (105)
श्री नरहरि दास जी प्रार्थना कर रहे हैं, हे श्यामा जू ! मुझे अपने रंगमहल की दासी बना दो ताकि मैं युगल सरकार के चरणों की निर्विवाद रूप से सेवा कर सकूँ और स्वामी श्री हरिदास जी ने जो वृन्दावन के युगल की लीला माधुरी पर प्रकाश डाला है उसका आस्वादन कर सकू ।
सरस नागरी नरहरि रसिक ललित जु चरन उपासी | |
वृन्दावन की सहज माधुरी श्रीस्वामी परकासी |
- श्री रूप सखी, रूप सखी जी की वाणी, सिद्धांत के पद (105)
श्री नरहरि दास जी प्रार्थना कर रहे हैं, हे श्यामा जू ! मुझे अपने रंगमहल की दासी बना दो ताकि मैं युगल सरकार के चरणों की निर्विवाद रूप से सेवा कर सकूँ और स्वामी श्री हरिदास जी ने जो वृन्दावन के युगल की लीला माधुरी पर प्रकाश डाला है उसका आस्वादन कर सकू ।

