निन्दां भगवत: शृण्वंस्तत्परस्य जनस्य वा ।
ततो नापैति य: सोऽपि यात्यध: सुकृताच्च्युत: ॥
- श्रीमद भागवतम (10.74.40)
जिस जगह भक्त या भगवान की निंदा होती है, यदि वह जगह जीव नहीं छोड़ता तो भक्ति निश्चित रूप से नष्ट होगी।
ततो नापैति य: सोऽपि यात्यध: सुकृताच्च्युत: ॥
- श्रीमद भागवतम (10.74.40)
जिस जगह भक्त या भगवान की निंदा होती है, यदि वह जगह जीव नहीं छोड़ता तो भक्ति निश्चित रूप से नष्ट होगी।

