बहुत गई थोरी रही, सोऊ बीती जाइ।
हित ध्रुव बेगि बिचारि कै, बसि वृन्दावन आइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियाँ (102)
हित ध्रुव बेगि बिचारि कै, बसि वृन्दावन आइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियाँ (102)
श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि जीवन का बहुत बड़ा भाग तो व्यर्थ ही व्यतीत हो गया और अब बहुत थोड़ा ही शेष बचा है; वह भी बड़ी तीव्रता से बीता जा रहा है। इसलिए हे जीव! तू शीघ्रता से विचार कर और सब कुछ छोड़कर श्री वृन्दावन धाम में आकर बस जा।

