श्री वृन्दाविपिन के वास की, यही रीति सो जानि।
निर्दोषिक निष्काम ह्वै, सेवौ रस की खानी॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत की साखी (441)
श्रीवृंदावन में वास करने की यही रीति है कि किसी पर दोषारोपण किए बिना, निष्काम भाव से (नित्य श्रीश्यामा-श्याम के चिंतन युक्त), रस की खान श्रीवृंदावन-धाम का सेवन करना चाहिए।
निर्दोषिक निष्काम ह्वै, सेवौ रस की खानी॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत की साखी (441)
श्रीवृंदावन में वास करने की यही रीति है कि किसी पर दोषारोपण किए बिना, निष्काम भाव से (नित्य श्रीश्यामा-श्याम के चिंतन युक्त), रस की खान श्रीवृंदावन-धाम का सेवन करना चाहिए।

