वृंदावन रस मोहि भावे हो |
ताकि हौं बलि जाऊं सखी री, जो कोई मोहि सुनावे हो ||
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (118)
श्री हरिराम व्यास जी (श्री विशाखा अवतार), वृन्दावन रस की महिमा का बखान करते हुए बताते हैं कि मुझे केवल वृन्दावन रस ही सुहाता है। मैं बार बार उन पर बलिहारी जाता हूँ, जो वृन्दावन रस की चर्चा करते हैं।
ताकि हौं बलि जाऊं सखी री, जो कोई मोहि सुनावे हो ||
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (118)
श्री हरिराम व्यास जी (श्री विशाखा अवतार), वृन्दावन रस की महिमा का बखान करते हुए बताते हैं कि मुझे केवल वृन्दावन रस ही सुहाता है। मैं बार बार उन पर बलिहारी जाता हूँ, जो वृन्दावन रस की चर्चा करते हैं।

