चलत फिरत बैठत उठत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (124)

चलत फिरत बैठत उठत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (124)

चलत फिरत बैठत उठत, लगी रहे यह आस।
श्याम राधिका निरखिबो, वृन्दाविपिन निवास॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (124)

श्री नारायण स्वामी बस यही कामना करते हैं कि चलते-फिरते, उठते-बैठते, सोते-जागते बस प्रिया-प्रियतम को ही निहारते रहें और श्रीधाम वृन्दावन में वास करें।