“यो मां सर्वेषु भूतेषु सन्तमात्मानम ईश्वरम |
हित्वार्चां भजते मौढ्याद् भस्मन्येव जुहोति सः | |
- श्रीमद भागवतम (3.29.22)
जो मन्दिरों में भगवान के विग्रह का पूजन करता है, किन्तु यह नहीं जानता कि परमात्मा रूप में ईश्वर प्रत्येक जीव के हृदय में आसीन हैं, वह अज्ञानी हैं और उसकी तुलना उस व्यक्ति से कि जाती हैं, जो राख में आहुतियाँ डालता हैं|
हित्वार्चां भजते मौढ्याद् भस्मन्येव जुहोति सः | |
- श्रीमद भागवतम (3.29.22)
जो मन्दिरों में भगवान के विग्रह का पूजन करता है, किन्तु यह नहीं जानता कि परमात्मा रूप में ईश्वर प्रत्येक जीव के हृदय में आसीन हैं, वह अज्ञानी हैं और उसकी तुलना उस व्यक्ति से कि जाती हैं, जो राख में आहुतियाँ डालता हैं|

